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हरियाणा में INLD और BSP का गठबंधन, 53 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी इनेलो, कांग्रेस के लिए होगी दिक्कत

INLD and BSP Alliance: INLD और BSP का गठबंधन हरियाणा की राजनीति में एक मजबूत दावेदार बनकर उभरा है। इस गठबंधन की ताकत यह है कि दोनों दलों का अपना-अपना जनाधार है और उनके समर्थक वर्गों में अच्छी पकड़ है। INLD का जनाधार मुख्य रूप से जाट समुदाय में है जबकि BSP का जनाधार दलित और पिछड़े वर्गों में है।
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INLD and BSP Alliance

चंडीगढ़: हरियाणा की राजनीति में एक खास मोड़ आया है जब इंडियन नेशनल लोकदल (Indian National Lok Dal) और बहुजन समाज पार्टी (Bahujan samaj party) ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इस गठबंधन में बीएसपी हरियाणा की 90 सीटों में से 37 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि गठबंधन के नेता अभय चौटाला होंगे। गठबंधन की घोषणा करते हुए अभय चौटाला ने कहा कि यह गठबंधन स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि लोगों की इच्छाओं के अनुसार किया गया है। उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन पार्टियों ने देश को लूटा है।

अभय चौटाला ने कहा कि वे गैर बीजेपी और गैर कांग्रेस गठबंधन करेंगे और सरकार बनाएंगे। वहीं बसपा के नेशनल कोआर्डिनेटर और मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद ने कहा कि अगर सरकार बनती है तो अभय चौटाला मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। यह गठबंधन केवल विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अन्य चुनाव भी एक साथ लड़े जाएंगे। आकाश आनंद ने बताया कि 6 जुलाई को मायावती और अभय चौटाला की मीटिंग हुई थी जिसके बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

INLD और BSP के बीच तीसरी बार गठबंधन

हरियाणा की राजनीति में यह तीसरी बार है जब INLD और BSP ने मिलकर गठबंधन किया है। पहली बार 1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों दलों के बीच गठबंधन हुआ था जिसमें INLD ने सात और BSP ने तीन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। दूसरी बार 2018 में दोनों दलों ने गठबंधन किया लेकिन यह गठबंधन विधानसभा चुनाव से पहले ही टूट गया था। अब 2024 के विधानसभा चुनाव के लिए तीसरी बार यह गठबंधन हुआ है जिसे हरियाणा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।

कांग्रेस के लिए होगी दिक्कत

INLD और BSP के गठबंधन से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है। बसपा हरियाणा की राजनीति में 1989 से किस्मत आजमा रही है। मायावती ने 1998 के लोकसभा चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल के साथ गठबंधन किया था और तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से एक सीट पर जीत दर्ज की थी। 2019 के चुनाव के लिए भी दोनों दलों ने हाथ मिलाया था लेकिन चुनाव से पहले गठबंधन टूट गया था। अब इस नए गठबंधन से कांग्रेस को हरियाणा में अपनी स्थिति मजबूत करने में कठिनाई हो सकती है।

हरियाणा में INLD और BSP का गठबंधन चुनावी रणनीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है। अभय चौटाला और आकाश आनंद ने मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस बार गठबंधन सफल हो और चुनाव में जीत हासिल की जा सके। यह गठबंधन हरियाणा की राजनीति में एक नई दिशा देने की संभावना रखता है लेकिन इसके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं।

पहली चुनौती यह है कि दोनों दलों को एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरना होगा और अपने कार्यकर्ताओं को भी एकजुट रखना होगा। दूसरी चुनौती यह है कि उन्हें बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ मजबूत रणनीति बनानी होगी और जनता के बीच अपनी साख बनानी होगी। तीसरी चुनौती यह है कि गठबंधन को लंबे समय तक बनाए रखना होगा ताकि वे आगामी चुनावों में भी एक साथ रह सकें।

INLD और BSP का गठबंधन हरियाणा की राजनीति में एक मजबूत दावेदार बनकर उभरा है। इस गठबंधन की ताकत यह है कि दोनों दलों का अपना-अपना जनाधार है और उनके समर्थक वर्गों में अच्छी पकड़ है। INLD का जनाधार मुख्य रूप से जाट समुदाय में है जबकि BSP का जनाधार दलित और पिछड़े वर्गों में है। इस प्रकार यह गठबंधन हरियाणा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हालांकि इस गठबंधन की कुछ कमजोरियाँ भी हैं। पहली कमजोरी यह है कि दोनों दलों के बीच पहले भी गठबंधन हो चुके हैं लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। दूसरी कमजोरी यह है कि उन्हें बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ मजबूत रणनीति बनानी होगी जो पहले से ही हरियाणा की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। तीसरी कमजोरी यह है कि उन्हें अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट रखना होगा ताकि वे चुनाव में सफल हो सकें।

INLD और BSP के इस गठबंधन का भविष्य कई कारकों पर निर्भर करेगा। सबसे पहले यह देखना होगा कि दोनों दल किस प्रकार एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरते हैं और अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखते हैं। दूसरा यह देखना होगा कि वे बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ कितनी मजबूत रणनीति बनाते हैं और जनता के बीच अपनी साख बनाते हैं। तीसरा यह देखना होगा कि वे गठबंधन को लंबे समय तक बनाए रखते हैं या नहीं।

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