नए साल से टोल को लेकर नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, अब इन लोगों को नहीं देना होगा टैक्स
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने निजी वाहन चलाने वालों को एक नई राहत दी है। अब आपको राष्ट्रीय राजमार्गों पर कम दूरी के सफर में टोल (toll) का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। 20 किलोमीटर तक की यात्रा के दौरान टोल टैक्स से छुटकारा मिलेगा।
Toll Tax Rules: यह राहत खासतौर पर उन निजी वाहनों के लिए है जो ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (GNSS) का इस्तेमाल करते हैं। यह नई व्यवस्था उन लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी साबित हो सकती है जो अक्सर लंबी यात्राओं के दौरान टोल बूथ्स पर खड़े होकर टोल शुल्क का भुगतान करने से परेशान हो जाते थे। इस सुविधा का प्रयोग फिलहाल कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया गया है और जल्द ही पूरे देश में इसे लागू करने की योजना बनाई जा रही है।
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क्या है जीएनएसएस (GNSS) और कैसे करेगा यह व्यवस्था काम?
यह नया नियम खासतौर पर ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (GNSS) द्वारा नियंत्रित होगा। GNSS एक अत्याधुनिक सैटेलाइट आधारित सिस्टम है जो हर वाहन की रियल-टाइम लोकेशन का ट्रैक रखता है। अब जब आप टोल रोड (toll road) का इस्तेमाल करेंगे तो आपका वाहन GPS के माध्यम से अपनी वास्तविक यात्रा की दूरी की माप करेगा। इस पद्धति से टोल की वसूली पूरी तरह से स्वचालित (automated) होगी और आपको केवल उतना ही भुगतान करना पड़ेगा जितनी दूर आपने यात्रा की होगी। खास बात यह है कि, अगर आप 20 किलोमीटर के भीतर टोल रोड पर यात्रा करते हैं तो कोई भी टोल शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
कहां होगा यह पहला पायलट प्रोजेक्ट?
यह नई व्यवस्था कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु-मैसूर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 275) और हरियाणा के पानीपत-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 709) पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्वयं घोषणा की कि इस व्यवस्था का उद्देश्य न केवल टोल वसूली को पारदर्शी बनाना है बल्कि इससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर में समय की बचत भी होगी।
यह प्रणाली पूरी तरह से ऑटोमेटेड होगी जहां सैटेलाइट आधारित ट्रैकिंग के जरिए ही टोल शुल्क की गणना होगी और इसे तुरंत वाहन मालिक के खाते से काट लिया जाएगा। नितिन गडकरी ने यह भी कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद जल्द ही यह व्यवस्था पूरे देश में लागू की जाएगी जिसके बाद देशभर के हाईवेज पर टोल बूथ्स समाप्त कर दिए जाएंगे।
क्यों है यह प्रणाली खास?
यह नई व्यवस्था सड़क परिवहन मंत्रालय की तरफ से एक बड़ा कदम है जो डिजिटलीकरण और स्मार्ट तकनीकी के इस्तेमाल में वृद्धि का प्रतीक है। अब यात्रियों को टोल वसूली के लिए टोल नाके पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी जिससे यातायात का दबाव कम होगा और लोगों का समय भी बच सकेगा। GNSS (Global Navigation Satellite System) से टोल की वसूली अपने आप होगी और यात्री केवल अपनी यात्रा के वास्तविक डेटा (actual data) के आधार पर ही शुल्क का भुगतान करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह प्रणाली पारदर्शिता (transparency), सुविधा (convenience) और तेज (speed) होगी।
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टोल सिस्टम में बदलाव से किसे होगा फायदा?
इस नई व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा छोटे निजी वाहनों के मालिकों को होगा जो नियमित रूप से यात्रा करते हैं और टोल शुल्क पर बड़ी राशि खर्च करते हैं। अब वे सिर्फ उस दूरी का भुगतान करेंगे जिसे उन्होंने तय किया है। इसके अलावा इससे सरकार को भी राजस्व एकत्र करने में पारदर्शिता मिलेगी और टोल सिस्टम को और अधिक कुशल बनाया जाएगा। खासतौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन मालिकों को इसका लाभ मिलेगा क्योंकि उन्हें अब हर टोल प्लाजा पर खड़ा होकर शुल्क भुगतान नहीं करना होगा।